कुंडली के सप्तम भाव में मंगल
कुंडली के सप्तम भाव में मंगल , सप्तम भाव में मंगल के अचूक उपाए , कुंडली के सातवे घर में मंगल

कुंडली के सप्तम भाव में मंगल

कुंडली के सप्तम भाव में मंगल

आइए पहले जानें कि कुंडली का सातवा भाव हमें क्या दर्शाता है

जन्म कुंडली का सप्तम भाव जातक के जीवनसाथी, साथी, विवाह, लगन, स्थिति, मूत्र पथ, वीर्य का प्रतिनिधित्व करता है।कुंडली का कौन सा भाव या घर हमें क्या दर्शाता है इसकी और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप मेरा वीडियो कुंडली कैसे देखे भी देख सकटे है ,

मंगल सूर्य की तरह एक बहुत गर्म और शुष्क ग्रह है, अग्नि मंगल का मुख्य तत्व है।

सप्तम भाव में मंगल का स्थान जातक को ऊर्जा, आक्रामकता, वर्चस्व, अधीर, हिंसक से भरा बनाता है। सप्तम भाव में मंगल का होना विवाहित जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। ऐसा जातक बहुत उग्र परवर्ती का होता है और और वह कभी भी किसी की सलाह या डायरेक्शन को नहीं मानना चाहता , वह सिर्फ अपनी चलना चाहता है , जो विवाहित जीवन में बाधा उत्पन्न करता है। ऐसे जातक की इच्छा के खिलाफ यदि कोई कार्य करता है तो वह उसकी नज़रों से उतर जाता है ।अतः ऐसे जातक की सोच को बदलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है सप्तम भाव में मंगल जातक को बहुत स्वतंत्र बनाता है और ऐसे जातक किसी से भी दिशा नहीं लेना चाहता है। यदि मंगल जातक के नवांश कुंडली में भी सप्तम भाव में है तो जान लीजिए की ऐसे जातक का वैवाहिक जीवन क्लेश से भरा होगा, और ये जातक के वैवाहिक जीवन का अंत तलाक से करवा सकने में सक्षम है

सप्तम भाव में मंगल का स्थान जातक को मांगलिक बनाता है जिसके कारण ऐसे जातक के विवाह में भारी विलम्ब होगा और यदि ऐसे जातक का विवाह होता है तो तलाक होने की बहुत अधिक संभावना रहती है |

जैसा की हम जानते है की यह घर व्यवसाय में साझेदारी को भी दर्शाता है, इसलिए यदि किसी जातक की जन्म कुंडली के सातवें घर में मंगल है तो ऐसे जातक को भागीदारों के साथ भारी संघर्ष का सामना करना पड़ेगा जिससे व्यापार में नुकसान होता है और बाद में उन्हें व्यवसाय बंद करना पद सकता है | ऐसे जातक को साझेदारी व्यापार या पार्टनरशिप बिज़नेस से दूर रहना चाहिए |

ऐसे व्यक्ति को जीवन की महत्वपूर्ण स्थितियों को संभालने के लिए जन्म कुंडली के सातवें घर में शनि वाले व्यक्ति से शादी करनी चाहिए। इसके पीछे एकमात्र कारण यह है कि शनि परिपक्वता, स्थिरता, धैर्य का ग्रह है, इसलिए, ऐसे व्यक्ति जिनके सप्तम भाव में शनि है, वे एक ऐसे व्यक्ति को संभालने में सक्षम होंगे |

आपको ये जानकारी बहुत ही काम सुनने को मिलेगी परन्तु ये जान लीजिये की हजारों कुंडलियों पर शोध करने के पश्चात ही मैं ये जानकारी आप लोगो से साझा कर रहा हूँ , और आप ये भी जान लीजिये की मांगलिक से मांगलिक का विवाह होना भी कोई जरूरी नहीं की उनके वैवाहिक जीवन को मजबूती देगा परन्तु मैंने बहुत सारे रिश्ते टूटते देखे हैं जो मांगलिक का विवाह मांगलिक से होता है।

विवाहित और दांपत्य जीवन के लिए मंगल सभी ग्रहों में सबसे अशुभ ग्रह है। यदि राहु को भी सातवें घर में मंगल के साथ रखा जाता है तो जातक को बहुत जल्द तलाक मिल जाएगा, राहु मंगल की शक्ति को नकारात्मक रूप से बढ़ा देता है। यदि विवाह के समय मंगल / राहु महादशा होगी तो विवाह के दो वर्ष के भीतर तलाक होने की बहुत अधिक संभावना होगी।

यदि किसी शुभ गृह की महादशा जातक पे चल रही हो तो ऐसे जातक अपने जीवन साथी का बहुत अधिक ख्याल रखते हैं , परन्तु जब यह महादशा समाप्त होती है या हनी वाली होती है तब मंगल अपना पूरा प्रकोप दिखाता है और ऐसे समय में इन जातको को सावधान रहना चाहिए |

इस तरह के जातक को मंगल महादशा के दौरान विवाह करने से बचना चाहिए या यदि मंगल अंतर्दशा आ रही है, तो यह जातक के विवाहित जीवन में भारी नकारात्मक प्रभाव पैदा करेगा।

सप्तम भाव का मंगल बहन के साथ सम्बन्धो को खराब बनाता है

ऐसे जातक जिनके सप्तम भाव में मंगल होता है .ऐसे जातको को मार्केटिंग नौकरियों में अच्छे परिणाम मिलेंगे क्योंकि सातवें घर में मंगल इस नौकरी के लिए पूरी ऊर्जा प्रदान करता है |

रोग: इस तरह के जातक रक्त प्रणाली से संबंधित बीमारियों से पीड़ित होंगे जिसमें महिलाओं में मासिक धर्म, हृदय रोग, त्वचा की समस्याएं, उच्च रक्तचाप, जननांग अंग रोग शामिल हैं।

सातवें घर में मंगल के उपाय:

इस तरह के जातक को बहनों और युवा लड़कियों को मिठाई दान करना चाहिए
इस तरह के जातक को घर की दीवार की नींव में 11 किलो लाल दाल दबानी चाहिए।
ऐसे जातक को मंगल मंत्र का जप करना चाहिए ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
* इस मंत्र का जाप 40 दिनों के भीतर 10000 बार करना चाहिए इस जातक को लाल मूंगे की माला से ये मंत्र करने चाहिए, उससे ऐसे जातको को अधिक लाभ होगा
ऐसे जातको को गरीबों में लाल कपड़े का दान भी करना चाहिए और हर मंगलवार ग्यारह हनुमान चालीसा का दान अलग अलग मंदिरो में करे और हनुमान चालीसा का जाप रोज अवशय करे इससे जातक को बहुत अधिक लाभ होगा

Sachin Sharmaa,
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