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अनुराधा नक्षत्र  क्या है

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अनुराधा नक्षत्र (डिग्री 3:20 - वृश्चिक राशि का 16:40) अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि होता है

अनुराधा नक्षत्र मे जन्मे जातक की उज्ज्वल आँखें होती है , अनुराधा नक्षत्र मे जन्मे जातक  कोमल और मृदुभाषी होते हैं। अनुराधा नक्षत्र में जन्मे जातकों में दृढ़ इच्छा शक्ति होती है और आप किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानेंगे। इस तरह के मूल निवासी किसी भी चुनौती के बावजूद जीवन में आगे बढ़ते हैं। ऐसे मूल निवासी देश | दुनिया के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करना पसंद करते हैं। इस तरह के मूल निवासी स्वादिष्ट भोजन खाना पसंद करते हैं इसलिए वे हमेशा नए स्वादिष्ट भोजन पर शोध करते हैं और विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से दूसरों को खुश करना पसंद करते हैं।

अनुराधा नक्षत्र मे जन्मे जातक पैसे की कमी से परेशान रहते है और ऐसे जातको को विदेश यात्रा से लाभ प्राप्त होता है प्रंतु ऐसे जातक विदेश जाने पर भी दुखी रहते है क्योकि ऐसे जातको को मात्र भूमि से प्रेम होता है  । ऐसे जातक 18 से 48 वर्ष की आयु तक जीवन में समस्याओं का सामना करते हैं और 48 वर्ष की आयु के बाद ऐसे जातक बहुत खुशहाल जीवन व्यतीत करते हैं।

ऐसे जातक निस्वार्थ और निर्मल होते हैं। इस तरह के जातक यह सोचे बिना दूसरों की मदद करने के लिए तैयार हैं कि उन्होंने उसके साथ क्या किया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग अपने पिता का समर्थन करते हैं और माता अपना वचन निभाती हैं |

यदि ग्रह ऐसे जातक को समर्थन देते हैं, तो आमतौर पर ऐसे जातक किसी अन्य देश में जीवन का अधिकतम समय बिताते हैं। विदेश में रहकर आप समाज में अधिकतम पद हासिल करते हैं।

इस तरह के जातक थोड़े आक्रामक होते हैं और कभी-कभी इस विषय पर दूसरा विचार दिए बिना अचानक प्रतिक्रिया करते हैं जो करीबी लोगों के साथ खराब संबंध बनाता है।

अनुराधा नक्षत्र के चार पदो में जन्मे जातक  :

पहला पद : इस पद का स्वामी  भगवान: सूर्य है | इस पद मे जन्मे जातक  आक्रामक स्वभाव के होते है  | सूर्य महादशा के दौरान ऐसे जातकों को मिश्रित परिणाम देते हैं। शनि दशा वित्त में अच्छा परिणाम देती है। मंगल की दशा जीवन में अच्छे परिणाम देती है। इस तरह के जातक सत्य , अच्छे कामों और ऐतिहासिक स्थानों में रुचि रखते हैं।

दूसरा पद: इस पद का स्वामी  भगवान बुध है ,इस पद मे जन्मे जातक  प्रकृति से प्रेम करने वाले , देवी देवता मे विश्वास रखने वाले होते है |  बुध में शनि की अंतर्दशा या इसके विपरीत, ऐसे जातकों के लिए अच्छे परिणाम देती है।  लेकिन शनि में मंगल या इसके विपरीत होने पर ऐसे जातकों को बुरा परिणाम मिलेगा। इस राशि में जन्म लेने वाले जातकों को राहु और बुध से अच्छे परिणाम मिलते हैं।

तृतीय पद: इस पद का स्वामी  शुक्र है | इस पद मे जन्मे जातक  को दीर्घायु जीवन मिलता है | शुक्र दशा के अच्छे परिणाम मिलते हैं और शनि दशा के भी अच्छे परिणाम मिलते हैं।

चौथा पद: इस पद का स्वामी  स्वामी मंगल है | इस पद मे जन्मे जातक  मंगल की दशा जीवन में अच्छे परिणाम देती हैं | शनि की दशा ऐसे जातको को अच्छे परिणाम नहीं देती है | इस तरह के जातक को रचनात्मक कार्यों में ऊर्जा का प्रवाह करना चाहिए। इस तरह के जातक डरपोक होते हैं और अधिकांश समय बोलते हैं।

Sachin Sharmaa,

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