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बारहवे भाव  मे केतु 

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आइए सबसे पहले समझते हैं कि जन्म कुंडली का बारहवां भाव किस राशि का प्रतिनिधित्व करता है: यह घर जातक के खर्च, अलगाव, हानि, नींद, कारावास, अस्पताल में भर्ती, विदेशी, त्याग, मानसिक संतुलन, पैर और आंखों का प्रतिनिधित्व करता है।

जन्म कुंडली के बारहवे भाव में केतु:

बारहवें घर को केतु का मजबूत घर माना जाता है। यह घर जीवन में मोक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। इस तरह के जातक अंतर्ज्ञान की एक अद्वितीय शक्ति के साथ धन्य हैं। ऐसे जातक काले जादू और अन्य रहस्यमय ज्ञान में रुचि रखते हैं। ऐसे जातक धीरे-धीरे मोक्ष की ओर बढ़ते हैं और समाज मे सबसे अलग हो जाते है   । यदि केतु महादशा साठ के दशक के दौरान जीवन के बाद के चरण में आई तो ऐसे जातको की  मोक्ष प्राप्त करने  की संभावनाए बढ़ जाती है अतः मोक्ष की तलाश में पथ की ओर बढ़ते हैं और ऐसे जातक  अपने परिवार को छोड़ देते हैं । ऐसे व्यक्ति जीवन में बहुत अधिक भावुक होते हैं |

बारहवें घर में केतु की नियुक्ति यह दर्शाती है कि इस जन्म के दौरान जातक को मोक्ष मिलेगा, जिसका अर्थ है कि यह उसका / उसका पिछला जन्म है इस जन्म मे उसको अपने पिछले जन्म के सभी करमो का परिणाम भुगतना पड़ता है |

केतु की अंतरदशा या महादशा ऐसे जातक को भारी नुकसान देती है |

ऐसे जातक को ,  जादूगर, मनोविश्लेषक, ज्योतिषी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, जासूस जैसे कार्य लाभ देते है |

जन्म कुंडली के बारहवें भाव में केतु के उपाय:

1. इस तरह के जातक को घर पर एक कुत्ता रखना चाहिए।

2. ऐसे जातकों को भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।

3. ऐसे जातक को शनिवार के दिन भैरोजी मंदिर जाना चाहिए।

4. ऐसे जातक को शनिवार को गरीबों को कंबल दान करना चाहिए।

5. केतु बीज मंत्र का जाप करना चाहिए: ओम् श्रीं श्रीं श्रीं शं केतवे नमः इस मंत्र का 40 दिनों के भीतर 17000 बार जप करना चाहिए, किसी को यह पता होना चाहिए कि इसका उच्चारण कैसे करें।

Sachin Sharmaa,

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